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Bihar Weather: बिहार के 27 जिलों में बारिश-वज्रपात का अलर्ट, तेज हवा के साथ बिगड़ सकता है मौसम

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | बिहार में मानसून सक्रिय है। 27 जिलों में बारिश, वज्रपात और तेज हवा का अलर्ट जारी है। गंडक और गंगा के बढ़ते जलस्तर के बीच बाढ़ का खतरा भी बना हुआ है।

बिहार, 27 अगस्त। राज्य में मानसून की सक्रियता के बीच मौसम का मिजाज एक समान नहीं है। कई इलाकों में बारिश का दौर चल रहा है तो कुछ जिलों में बादल और उमस के बीच लोग गर्मी से परेशान हैं। इसी बीच मौसम विभाग ने राज्य के कई हिस्सों में बारिश, गरज-चमक और वज्रपात की चेतावनी जारी की है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के पटना केंद्र के पूर्वानुमान में 27 अगस्त को बिहार में भारी बारिश के साथ आंधी-तूफान और बिजली गिरने की गतिविधि की संभावना जताई गई है।

मौसम विभाग के अलर्ट के बीच लोगों को खास तौर पर आकाशीय बिजली से सावधान रहने की जरूरत है। खराब मौसम के दौरान खुले मैदान, खेत, पेड़ के नीचे और बिजली के खंभों के आसपास खड़े होने से बचने की सलाह दी जाती है। किसानों के लिए भी यह चेतावनी महत्वपूर्ण है, क्योंकि बारिश और वज्रपात के दौरान खेतों में काम करना जोखिम भरा हो सकता है।

27 जिलों में मौसम को लेकर सतर्कता

जिन जिलों को लेकर अलर्ट की बात सामने आई है, उनमें पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, शिवहर, सीतामढ़ी, मधुबनी, गोपालगंज, सीवान, सारण, बक्सर, भोजपुर, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, वैशाली, समस्तीपुर, कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद, शेखपुरा, बेगूसराय, खगड़िया, पटना, जहानाबाद, अरवल, गया, नवादा, जमुई और लखीसराय शामिल हैं।

इन इलाकों में मौसम अचानक करवट ले सकता है। कुछ स्थानों पर बादल घिरने के बाद तेज बारिश हो सकती है, जबकि दूसरे इलाकों में हल्की या रुक-रुककर बारिश देखने को मिल सकती है। मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ दिनों तक बिहार में गरज-चमक और बारिश की गतिविधियां बनी रहने की संभावना है। पटना मौसम केंद्र के पूर्वानुमान में 28 से 30 अगस्त तक भी गरज-चमक और बिजली गिरने की संभावना का उल्लेख किया गया है।

पटना में बादल और उमस के बीच बारिश की उम्मीद

राजधानी पटना में भी मौसम का असर मिला-जुला रहने की संभावना है। आसमान में बादलों की आवाजाही के साथ कुछ इलाकों में हल्की बारिश हो सकती है। बारिश होने पर तापमान में कुछ गिरावट आने से उमस से परेशान लोगों को राहत मिल सकती है।

हालांकि, बारिश हर इलाके में एक जैसी नहीं होगी। मौसम की स्थानीय परिस्थितियों के कारण एक क्षेत्र में बारिश हो सकती है, जबकि कुछ किलोमीटर दूर दूसरे इलाके में केवल बादल छाए रह सकते हैं। यही वजह है कि लोगों को स्थानीय मौसम अपडेट पर नजर बनाए रखने की जरूरत है।

मानसून सक्रिय, लेकिन बारिश की कमी अब भी बरकरार

बिहार में इस मानसून सीजन के दौरान बारिश का आंकड़ा अभी भी सामान्य से नीचे बताया जा रहा है। 26 अगस्त तक राज्य में सामान्य 741.2 मिलीमीटर के मुकाबले 428.6 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड होने की बात सामने आई है। यानी मानसून के बावजूद राज्य में कुल बारिश सामान्य स्तर तक नहीं पहुंच सकी है।

बारिश की कमी का असर खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में होने वाली बारिश किसानों के लिए राहत लेकर आ सकती है। हालांकि, जहां बारिश खेती के लिए फायदेमंद है, वहीं बहुत कम समय में अत्यधिक बारिश होने पर जलजमाव और फसल नुकसान की स्थिति भी पैदा हो सकती है।

नेपाल की बाढ़ ने बढ़ाई बिहार की चिंता

मौसम की चेतावनी के साथ बिहार के लिए दूसरी बड़ी चिंता नदियों का बढ़ता जलस्तर है। पड़ोसी नेपाल में भारी बारिश और बाढ़ के बाद बिहार के सीमावर्ती इलाकों में भी सतर्कता बढ़ाई गई है। 27 अगस्त को बिहार और उत्तर प्रदेश को नेपाल की बाढ़ की स्थिति के बाद हाई अलर्ट पर रखे जाने और अतिरिक्त NDRF टीमों की तैनाती की खबर सामने आई है।

बिहार में गंडक समेत कई नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है। गंगा का जलस्तर भी कई इलाकों में चिंता का कारण बना हुआ है। नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी और बारिश एक साथ होने पर निचले इलाकों में बाढ़ तथा जलजमाव का खतरा बढ़ सकता है।

प्रशासन की ओर से संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाना जरूरी हो गया है। नदी किनारे रहने वाले लोगों को जलस्तर में अचानक बढ़ोतरी की स्थिति में प्रशासन के निर्देशों का पालन करने और सुरक्षित स्थानों की ओर जाने के लिए तैयार रहने की जरूरत है।

NDRF और SDRF की तैनाती पर जोर

बाढ़ की आशंका वाले इलाकों में आपदा प्रबंधन तंत्र को सक्रिय रखा गया है। NDRF और SDRF की टीमों को जरूरत के मुताबिक संवेदनशील क्षेत्रों में तैयार रखा जा रहा है। प्रशासन की प्राथमिकता निचले इलाकों में रहने वाले लोगों तक समय पर सूचना पहुंचाना और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना है।

बाढ़ की स्थिति में केवल नदी के किनारे रहने वाले लोगों के लिए ही खतरा नहीं होता, बल्कि सड़क संपर्क, बिजली आपूर्ति, पेयजल और आवागमन भी प्रभावित हो सकता है। ऐसे में जिला प्रशासन, जल संसाधन विभाग और आपदा प्रबंधन विभाग के बीच समन्वय बेहद महत्वपूर्ण है।

बिजली गिरने के दौरान क्या करें?

मौसम खराब होने पर लोगों को खुले स्थानों से दूर रहना चाहिए। खेत में काम कर रहे किसान बारिश और गरज-चमक शुरू होते ही सुरक्षित स्थान पर चले जाएं। पेड़ के नीचे खड़े होने से बचें और संभव हो तो पक्की इमारत के अंदर रहें।

बिजली गिरने की स्थिति में मोबाइल टावर, बिजली के खंभे, ऊंचे पेड़ और खुले मैदान जोखिम वाले स्थान हो सकते हैं। ग्रामीण इलाकों में लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।

अगले कुछ दिन मौसम रहेगा सक्रिय

मौसम विभाग के पूर्वानुमान से साफ है कि बिहार में अगले कुछ दिनों तक मौसम पूरी तरह शांत रहने वाला नहीं है। बारिश के साथ गरज-चमक और वज्रपात की गतिविधियां बनी रह सकती हैं।

ऐसे में एक तरफ बारिश किसानों के लिए राहत बन सकती है, तो दूसरी तरफ तेज बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में परेशानी बढ़ सकती है। राज्य में मौसम और नदियों की स्थिति पर प्रशासन की नजर बनी रहना जरूरी है।

लोगों को सलाह है कि मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन की चेतावनियों को गंभीरता से लें। अनावश्यक रूप से नदी, नहर या जलभराव वाले क्षेत्रों के पास न जाएं और बिजली चमकने के दौरान खुले में रहने से बचें।

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बारिश राहत भी, चुनौती भी

बिहार में बारिश का इंतजार लंबे समय से किसानों को रहा है, लेकिन मानसून की बारिश का दूसरा पहलू भी है। सामान्य से कम बारिश के बीच अच्छी वर्षा खेती के लिए राहत दे सकती है, मगर नदियों का जलस्तर बढ़ने पर यही बारिश बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए चुनौती बन जाती है।

नेपाल में भारी बारिश के बाद बिहार की नदियों पर बढ़ता दबाव इस चिंता को और गंभीर करता है। इसलिए इस समय सबसे जरूरी है कि मौसम विभाग की चेतावनियों को केवल सामान्य मौसम सूचना न माना जाए। किसानों, नदी किनारे रहने वाले परिवारों और प्रशासन—तीनों को सतर्क रहना होगा। बारिश के दौरान सावधानी और समय पर चेतावनी ही जान-माल के नुकसान को कम कर सकती है।

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